• थकन मुझको याद है, ये सौंधी-सौंधी ख़ुश्बू, दरख़्तों की ये छाँव, ये बारिश के पछाटे, ये झूमती गाती फ़सलें, ये टूटे से वीराने, और छोटी सी ये जन्नत, जिसमें […]

    थकन

    मुझको याद है, ये सौंधी-सौंधी ख़ुश्बू, दरख़्तों की ये छाँव, ये बारिश के पछाटे, ये झूमती गाती फ़सलें, ये टूटे से वीराने, और छोटी सी ये जन्नत, जिसमें रहती थी वो बुढ़िया, कि, जिसके हाथों को छू लूँ, तो आता था वो हौसला मुझे, की इक...

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    अगर तुम दिल हमारा ले के पछताए तो रहने दो अगर तुम दिल हमारा ले के पछताए तो रहने दो, न काम आए तो वापस दो जो काम आए तो रहने दो। मिरा रहना तुम्हारे दर पे लोगों को खटकता है, अगर कह दो तो उठ ज […]

    अगर तुम दिल हमारा ले के पछताए तो रहने दो

    https://youtu.be/RrQIokJAEbI अगर तुम दिल हमारा ले के पछताए तो रहने दो, न काम आए तो वापस दो जो काम आए तो रहने दो। मिरा रहना तुम्हारे दर पे लोगों को खटकता है, अगर कह दो तो उठ जाऊँ जो रहम आए तो रहने...

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    अपूर्ण प्रश्न और तो नहीं मुझे परन्तु चाह एक, जो सुनो, कहूँ विषाद, दुःख, कामना सभी। जो सुनो कहूँ अमोल अश्रुओं का घोर नाद, प्रेम में बही यहाँ अथाह प् […]

    अपूर्ण

    प्रश्न और तो नहीं मुझे परन्तु चाह एक, जो सुनो, कहूँ विषाद, दुःख, कामना सभी। जो सुनो कहूँ अमोल अश्रुओं का घोर नाद, प्रेम में बही यहाँ अथाह प्रीत की नदी।। चाह एक ही मुझे, कहूँ तुम्हें हृदै कि बात, वो, कहूँ अनन्य पीर,...

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    निर्झर यह कविता ‘निर्झर’ राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त जी की पुस्तक ‘मङ्गल-घट’ से ली गई है। शत-शत बाधा-बंधन तोड़,निकल चला मैं पत्थर फोड़।प्लावित कर […]

    निर्झर

    यह कविता 'निर्झर' राष्ट्रकवि श्री मैथिलीशरण गुप्त जी की पुस्तक 'मङ्गल-घट' से ली गई है। शत-शत बाधा-बंधन तोड़,निकल चला मैं पत्थर फोड़।प्लावित कर पृथ्वी के पर्त्त,समतल कर बहु गह्वर गर्त्त,दिखला कर आवर्त्त-विवर्त्त,आता हूँ आलोड़ विलोड़,निकल चला मैं पत्थर फोड़।पारावार-मिलन की...

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    इन आँखों में रौशन रौशन कोई ख्वाब झलकता है इन आँखों में रौशन रौशन कोई ख्वाब झलकता है, इन बातों में देखो जैसे कोई राज़ खटकता है। लहजे में एक जुस्तुजू, सीने में बेचैनी सी है, मेरा ग़म तो मेरा ह […]

    इन आँखों में रौशन रौशन कोई ख्वाब झलकता है

    इन आँखों में रौशन रौशन कोई ख्वाब झलकता है, इन बातों में देखो जैसे कोई राज़ खटकता है। लहजे में एक जुस्तुजू, सीने में बेचैनी सी है, मेरा ग़म तो मेरा है, तू क्यों महताब सिसकता है? इन कूचों में काम तिरा क्या,...

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