भजन

तन-मन एक हुए सब ही अब,
कृष्ण तुम्हें भजते भजते।
सजल विलोचन आज हुए सब,
कृष्ण तुम्हें भजते भजते।।

यह मन आज तुम्हें कर अर्पित,
दूर हुई असमंजस से।
हृदय तुम्हें सिमरे अब केवल,
दूर हुआ यह तो जग से।।

हृदय तुम्हें भजते भजते यह,
अश्रु रहा छलका-टपका।
अब बस दीख रहे तुम ही तुम,
नाथ करो अब आप कृपा।।

मुझ पर हे! प्रभु आज कृपा कर,
तार मुझे तुम दो जग से।
बस यह चाह रही मुझको अब,
मैं मरती तुमको भजते।।
~क़लमकश
