भजन
तन-मन एक हुए सब ही अब,
कृष्ण तुम्हें भजते भजते।
सजल विलोचन आज हुए सब,
कृष्ण तुम्हें भजते भजते।।
तन-मन एक हुए सब ही अब,
कृष्ण तुम्हें भजते भजते।
सजल विलोचन आज हुए सब,
कृष्ण तुम्हें भजते भजते।।
हैं नहीं आँसू तलक भी अब मुक़द्दर में मिरे,
ख़ूबियाँ कैसी हैं देखो तो सितमगर में मिरे।
था न-जाने कब से इक कतरा लहू का आँख में,
आज टपका तो दिखा क्या था तसव्वुर में मिरे।
तीर रहने दो जिगर में क्यों निकालें हम इसे,
इक यही तो याद दिलबर की रही घर में मिरे।
क्या करूँ ग़म जो मुझे अब बे-मुरव्वत कह दिया,
रोज़ क़िस्से लाख उड़ते हैं जहाँ भर में मिरे।
जानता हूँ मैं बड़ी खलती तुम्हें ख़ल्वत मगर,
है नहीं कोई दरीचा, और दर, घर में मिरे।
मन बहुत सोचता है कि उदास न हो पर उदासी के बिना रहा कैसे जाए? शहर के दूर के तनाव दबाव कोई सह भी ले, पर यह अपने ही रचे एकांत का दबाव सहा कैसे…
देखूँ किसी भी ओर उसी ओर चलूँ मैं,
रस्ते सभी हैं एक से तो क्या ही करूँ मैं।
मुझको मिला है एक सफ़र में नया रहबर,
दिखला रहा रस्ता कि जिसे पा न सकूँ मैं।
पिन्दार मिरे और बड़ा, और बड़ा हो,
तुझको ही मिले जो मिले, तुझसे ही मिलूँ मैं।
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आज हिंदी दिवस है और हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।
Born on March 5, 1902, in Khekra Nagar, United Provinces, to the esteemed businessman Seth Chhajjumal, whose business spanned the…
दिल-ए-मुज़्तर, दिल-ए-नाशाद, ये नाराज़गी कैसी,
न रंज हो, ना सितम, ना ठोकरें तो ज़िंदगी कैसी।
The girls who assassinated the British district magistrate. The girls who avenged the hanging of ‘Shaheed Bhagat Singh’.
Mir Taqi Mir was an Urdu poet known for his legacy of love and betrayal poetries. Here are two famous ghazals of ‘Mir’.
कौन है वो जिससे पिछली शाम मिले, क्या कोई अनजान शख्स? या तुम्हारी तन्हाई? “तन्हाई” is an Urdu Nazm beautifully composed by Kalamkash.